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CEC ज्ञानेश कुमार पर ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने का आरोप

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने 4 नवंबर 2026 को सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को शिकायत की जांच करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अभी रिश्वत मांगने या इंजीनियर की मौत में ज्ञानेश कुमार की किसी भूमिका का आरोप साबित नहीं हुआ है।

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CEC ज्ञानेश कुमार पर ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने का आरोप

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 4 नवंबर 2026

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार एक पुराने भ्रष्टाचार मामले में लगे नए आरोपों के कारण चर्चा में हैं। केरल सरकार ने उनके खिलाफ ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने के आरोपों की विजिलेंस जांच कराने का आदेश दिया है। यह मामला करीब दो दशक पुरानी सड़क निर्माण परियोजना से जुड़ा है, जब ज्ञानेश कुमार केरल सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव थे। एक पूर्व ठेकेदार ने आरोप लगाया है कि लगभग ₹17 करोड़ के स्वीकृत बिलों का भुगतान जारी करने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। मामला एक मलेशियाई इंजीनियर की कथित आत्महत्या से भी जुड़ा हुआ है।

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने 4 नवंबर 2026 को सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को शिकायत की जांच करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अभी रिश्वत मांगने या इंजीनियर की मौत में ज्ञानेश कुमार की किसी भूमिका का आरोप साबित नहीं हुआ है।

क्या है ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने का पूरा मामला?

यह विवाद केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत सड़क निर्माण और उन्नयन कार्य से जुड़ा है। करीब 20 साल पहले केरल में मुख्य सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए परियोजनाएं शुरू की गई थीं। इनमें एमसी रोड के उन्नयन का काम भी शामिल था। इस परियोजना से भारत और मलेशिया के संयुक्त उपक्रम PATI-BEL का संबंध था। परियोजना के दौरान निर्माण कार्य, ठेकेदारों के भुगतान और स्वीकृत बिलों को लेकर विवाद सामने आया था।

शिकायत के अनुसार, निर्माण कार्य के लगभग ₹17 करोड़ के बिल संबंधित इंजीनियरों ने मंजूर कर दिए थे। इसके बावजूद कथित तौर पर भुगतान के चेक जारी नहीं किए गए। आरोप है कि उस समय केरल के PWD सचिव रहे ज्ञानेश कुमार ने भुगतान जारी करने के बदले ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगी थी। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अब विजिलेंस एजेंसी से इसकी जांच करने को कहा गया है।

किसने लगाए ज्ञानेश कुमार पर रिश्वत मांगने के आरोप?

इस मामले में शिकायत करने वाले व्यक्ति का नाम वी. ओ. साजन बताया गया है। वह केरल के कोल्लम जिले के चादयामंगलम क्षेत्र के रहने वाले हैं और संबंधित परियोजना में ठेकेदारी तथा सामग्री आपूर्ति से जुड़े रहे थे। साजन ने विजिलेंस निदेशक के सामने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि सड़क निर्माण परियोजना का भुगतान जानबूझकर रोका गया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, PATI-BEL से जुड़े मलेशियाई प्रोजेक्ट इंजीनियर ली सी बीन ने उन्हें बताया था कि सरकारी स्तर पर रिश्वत की मांग के कारण भुगतान रोका जा रहा है। साजन का दावा है कि उन्होंने कंपनी से जुड़े लोगों को विवाद सुलझाने के लिए बातचीत करने का सुझाव दिया था, लेकिन कंपनी प्रबंधन कथित रिश्वत देने के लिए तैयार नहीं था।

इसके बाद भी भुगतान जारी नहीं होने से परियोजना में काम करने वाले ठेकेदारों और श्रमिकों की आर्थिक परेशानियां बढ़ती गईं। साजन ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वह अन्य गवाहों तथा कंपनी के पूर्व कर्मचारियों की जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।

मलेशियाई इंजीनियर की मौत से कैसे जुड़ा मामला?

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की मौत से जुड़ा है। ली सी बीन PATI-BEL परियोजना से जुड़े प्रमुख इंजीनियर थे। शिकायतकर्ता साजन के अनुसार, सरकारी भुगतान में देरी के कारण कंपनी के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया था।

आरोप है कि ठेकेदारों और कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए ली सी बीन ने बेंगलुरु में कंपनी की एक अन्य परियोजना से धन का इस्तेमाल किया था। साजन का दावा है कि स्वीकृत बिलों का भुगतान नहीं होने और कथित रिश्वत की मांग के कारण इंजीनियर मानसिक तथा आर्थिक दबाव में आ गए थे।

बाद में ली सी बीन की आत्महत्या का मामला सामने आया। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इंजीनियर के कथित सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार की भूमिका का उल्लेख था। उनका यह भी कहना है कि मलेशिया में रहने वाले इंजीनियर के परिवार ने कंपनी के कुछ कर्मचारियों को इस संबंध में जानकारी दी थी।

हालांकि, कथित सुसाइड नोट की प्रामाणिकता, उसमें लिखी बातों और आत्महत्या से रिश्वत के आरोप के संबंध की अभी जांच होनी बाकी है। रिपोर्टों में इंजीनियर की मृत्यु के वर्ष को लेकर भी अंतर है। कुछ रिपोर्टों में नवंबर 2005, जबकि अन्य में 2006 का उल्लेख है।

2006 में भी हुई थी विजिलेंस जांच, फिर क्यों बंद हो गया मामला?

यह पहली बार नहीं है जब इस सड़क निर्माण परियोजना को लेकर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की बात सामने आई है। मलेशियाई इंजीनियर की मौत के बाद वर्ष 2006 में भी केरल में विजिलेंस जांच शुरू हुई थी। उस समय परियोजना के भुगतान और अधिकारियों की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे।

हालांकि, पिछली जांच में आरोप स्थापित नहीं हो सके थे। इसके बाद मामले में आगे कार्रवाई नहीं की गई और जांच बंद कर दी गई। अब शिकायतकर्ता साजन ने पुरानी जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पिछली जांच के दौरान उनसे और ऐसे दूसरे लोगों से पूछताछ नहीं की गई, जिन्हें कथित रिश्वत मांगने की जानकारी थी।

साजन के अनुसार, यदि संबंधित गवाहों, कंपनी के पूर्व कर्मचारियों और मलेशिया में रहने वाले इंजीनियर के परिवार के लोगों के बयान दर्ज किए जाते, तो मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते थे। नई जांच में यह भी देखा जा सकता है कि पिछली जांच में किसी जरूरी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी तो नहीं हुई थी।

केरल सरकार ने अब जांच के आदेश क्यों दिए?

मामले में नया घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़े नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल ने पुरानी परियोजना और इंजीनियर की मौत से संबंधित शिकायत उठाई। रिपोर्टों के अनुसार, 4 अक्टूबर 2026 को गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने उनकी शिकायत के आधार पर विजिलेंस जांच के निर्देश दिए थे।

इसके बाद पूर्व ठेकेदार साजन की नई शिकायत सामने आई, जिसमें ₹2 करोड़ की कथित रिश्वत मांगने और ₹17 करोड़ के भुगतान रोके जाने का उल्लेख किया गया। विजिलेंस विभाग ने मामले में आगे की कार्रवाई के लिए गृह विभाग से अनुमति मांगी। कानूनी राय प्राप्त करने के बाद जांच की अनुमति देने का निर्णय लिया गया। अब VACB की टीम पहले से चल रही प्रारंभिक जांच के साथ नई शिकायत में लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल करेगी।

क्या ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज हो गई है?

इस मामले में 4 नवंबर को सामने आई रिपोर्टों में जांच की प्रक्रिया को लेकर कुछ अंतर है। खबरों के अनुसार, केरल गृह विभाग ने प्रारंभिक जांच का निर्देश दिया है और एफआईआर दर्ज करने के संबंध में निर्णय जांच के बाद लिया जाएगा। दूसरी ओर, स्थानीय समाचार संस्थानों ने कानूनी राय के बाद औपचारिक मामला दर्ज कर जांच करने की अनुमति दिए जाने की खबर प्रकाशित की है। इसलिए अभी उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एफआईआर निश्चित रूप से दर्ज हो चुकी है। फिलहाल पुष्टि इस बात की है कि सरकार ने आरोपों की जांच कराने के लिए कदम उठाए हैं।

ज्ञानेश कुमार कौन हैं और केरल से उनका क्या संबंध है?

ज्ञानेश कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1988 बैच के केरल कैडर के अधिकारी रहे हैं। उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की थी। इसके बाद वित्त और पर्यावरण अर्थशास्त्र से संबंधित अध्ययन भी किया। अपने प्रशासनिक करियर में उन्होंने केरल सरकार और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। केरल में उन्होंने एर्नाकुलम के जिला कलेक्टर सहित विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। वह लोक निर्माण विभाग के सचिव भी रहे।

केंद्र सरकार में उन्होंने गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। 31 जनवरी 2024 को सेवानिवृत्ति के बाद 15 मार्च 2024 को उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। 19 फरवरी 2025 को ज्ञानेश कुमार ने भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला।

SIR विवाद के बीच क्यों बढ़ा इस मामले का महत्व?

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। ऐसे माहौल में करीब दो दशक पुराने भ्रष्टाचार के आरोपों की नए सिरे से जांच का आदेश राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केरल की सड़क निर्माण परियोजना से जुड़े आरोप और वर्तमान SIR विवाद दो अलग-अलग मामले हैं। किसी एक मामले में लगाए गए आरोपों को दूसरे मामले का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

जांच में किन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

विजिलेंस एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या सड़क निर्माण परियोजना के लगभग ₹17 करोड़ के बिल वास्तव में स्वीकृत होने के बावजूद रोके गए थे।इसके साथ यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि भुगतान जारी करने की प्रशासनिक प्रक्रिया क्या थी और उस समय किस अधिकारी के पास भुगतान रोकने या स्वीकृत करने का अधिकार था।

जांच में कथित ₹2 करोड़ की रिश्वत की मांग का कोई दस्तावेजी प्रमाण, गवाह या अन्य विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध है या नहीं, इसकी पड़ताल की जा सकती है। मलेशियाई इंजीनियर की मौत से संबंधित दस्तावेजों, कथित सुसाइड नोट और पुराने जांच रिकॉर्ड की भी समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। इसके अतिरिक्त, 2006 की जांच किन आधारों पर बंद की गई थी और क्या नई शिकायत में ऐसे तथ्य हैं जिनकी पहले जांच नहीं हुई थी, यह भी महत्वपूर्ण प्रश्न है।

ज्ञानेश कुमार का क्या है पक्ष?

4 नवंबर 2026 तक प्रकाशित प्रमुख रिपोर्टों के अनुसार, ज्ञानेश कुमार की ओर से इन नए आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस मामले में न तो रिश्वत मांगने का आरोप साबित हुआ है और न ही मलेशियाई इंजीनियर की मौत में उनकी किसी भूमिका की पुष्टि हुई है। इसलिए किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जांच एजेंसी द्वारा साक्ष्यों की पड़ताल और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा।

20 साल पुराने मामले में जांच से क्या सामने आएगा?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केरल सरकार का विजिलेंस जांच का आदेश करीब दो दशक पुराने मामले को फिर चर्चा में ले आया है। एक तरफ पूर्व ठेकेदार ने ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने, ₹17 करोड़ का भुगतान रोकने और मलेशियाई इंजीनियर की मौत से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ वर्ष 2006 की पूर्व जांच में आरोप स्थापित नहीं हो सके थे। अब नई जांच का महत्व इसी बात में है कि क्या शिकायतकर्ता के दावों के समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य मिलते हैं और क्या पूर्व जांच से अलग कोई नया तथ्य सामने आता है। फिलहाल यह मामला आरोपों और जांच के स्तर पर है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार सिद्ध होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

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