LIVE 24 TV · 1/41
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 101वें स्थापना दिवस और शताब्दी वर्ष के समापन पर नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक मोहन भागवत ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता, युवाओं की जिम्मेदारी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नशे की बढ़ती समस्या और दुनिया में जारी आंदोलनों पर विचार रखे।
LIVE 24 TV · 2/41
नई दिल्ली | 20 अक्टूबर 2026 नागपुर, 20 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लिए इस वर्ष का विजयादशमी उत्सव ऐतिहासिक महत्व का रहा। संघ की स्थापना के 101 वर्ष पूरे होने और शताब्दी समारोहों के समापन के अवसर पर महाराष्ट्र के नागपुर स्थित
LIVE 24 TV · 3/41
रेशिमबाग मैदान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वयंसेवकों के पारंपरिक पथ संचलन से हुई। इसके बाद सरसंघचालक शस्त्र पूजन किया और उपस्थित स्वयंसेवकों तथा अतिथियों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान,
LIVE 24 TV · 4/41
राष्ट्रीय एकता, युवा पीढ़ी, सामाजिक अनुशासन और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता तथा समाज में बढ़ते असंतोष को लेकर भी चिंता व्यक्त की। इस बार उनका संबोधन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्होंने केवल संघ की
LIVE 24 TV · 5/41
उपलब्धियों तक अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि देश और दुनिया के सामने उपस्थित सामाजिक, राजनीतिक तथा तकनीकी चुनौतियों को भी संबोधित किया। मोहन भागवत के भाषण की छह प्रमुख बातें 1. फ्रांस सहित दुनिया के आंदोलनों पर चिंता मोहन भागवत ने अपने संबोधन में
LIVE 24 TV · 6/41
दुनिया के विभिन्न देशों में उभर रहे असंतोष, विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के आंदोलनों के संदर्भ में भारत को सतर्क रहने का संदेश दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी सरकार का बदल जाना अपने आप में सभी सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं
LIVE 24 TV · 7/41
होता। यदि समाज में आपसी अविश्वास, कटुता और विभाजन बना रहता है, तो राजनीतिक परिवर्तन के बाद भी चुनौतियां समाप्त नहीं होतीं। फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में हुए आंदोलनों का संदर्भ देते हुए उन्होंने भारत में सामाजिक स्थिरता बनाए रखने की
LIVE 24 TV · 8/41
आवश्यकता बताई। भागवत ने आरोप लगाया कि कुछ वैश्विक शक्तियां अपने हितों के लिए दूसरे देशों की आंतरिक अस्थिरता का लाभ उठाती हैं। हालांकि, ऐसे किसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है; इसे उनके राजनीतिक-सामाजिक आकलन के रूप में
LIVE 24 TV · 9/41
ही देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और आंदोलन स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान खोजना आना चाहिए। विरोध के दौरान संविधान और कानून की मर्यादाओं का पालन आवश्यक है। 2. Gen-Z और युवा पीढ़ी को संदेश संघ प्रमुख
LIVE 24 TV · 10/41
ने नई पीढ़ी, विशेषकर सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक के दौर में विकसित हो रहे युवाओं की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहले परिवार, विद्यालय और सामाजिक वातावरण के माध्यम से संस्कार तथा जीवन-मूल्य नई पीढ़ी तक पहुंचते थे। अब युवाओं तक इंटरनेट और सोशल
LIVE 24 TV · 11/41
मीडिया के जरिए सूचनाओं का विशाल भंडार पहुंच रहा है। लेकिन प्रत्येक सूचना सही, उपयोगी या विश्वसनीय हो, यह आवश्यक नहीं है। उनके अनुसार, नई पीढ़ी को केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनाना पर्याप्त नहीं होगा। उसमें सही और गलत के बीच अंतर करने की क्षमता, सामाजिक
LIVE 24 TV · 12/41
जिम्मेदारी, अनुशासन तथा सकारात्मक सोच भी विकसित करनी होगी। उन्होंने ओटीटी मंचों और सोशल मीडिया की सामग्री को लेकर भी चिंता व्यक्त की। भागवत का कहना था कि ऐसी सामग्री के प्रभाव पर सरकार और समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने
LIVE 24 TV · 13/41
डिजिटल माध्यमों पर विवेकपूर्ण नियमन की आवश्यकता बताई। 3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चेतावनी अपने भाषण में मोहन भागवत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने विज्ञान और नई तकनीकों को मानव जीवन के लिए
LIVE 24 TV · 14/41
उपयोगी बताया, लेकिन साथ ही इनके दुरुपयोग के संभावित खतरों की ओर ध्यान दिलाया। भागवत के अनुसार, तकनीक अपने आप में अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि मनुष्य के हाथों में उपलब्ध एक साधन है। उसका परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से
LIVE 24 TV · 15/41
किया जाता है। उन्होंने आगाह किया कि AI जैसी उपयोगी तकनीक का इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, लोगों को भ्रमित करने तथा धोखाधड़ी के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने परमाणु विज्ञान का उदाहरण देते हुए समझाया कि वैज्ञानिक उपलब्धियों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन
LIVE 24 TV · 16/41
जैसे कल्याणकारी उद्देश्यों और विनाशकारी हथियार बनाने, दोनों के लिए संभव है। इसलिए तकनीकी विकास के साथ नैतिक जिम्मेदारी, मानवीय संवेदनशीलता और उचित नियमन भी आवश्यक हैं। मोहन भागवत ने ये भी कहा कि, AI और अन्य आधुनिक तकनीकों को स्वीकार किया जाए, लेकिन
LIVE 24 TV · 17/41
उनका उपयोग सत्य, मानव कल्याण और जिम्मेदार विकास के लिए होना चाहिए। 4. भारत की विविधता ही उसकी शक्ति, समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों से बचने का संदेश मोहन भागवत ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता और उस विविधता के बीच मौजूद एकता है।
LIVE 24 TV · 18/41
उन्होंने धार्मिक मान्यताओं, भाषा, जाति, क्षेत्र, खानपान और परंपराओं में अंतर होने के बावजूद समाज में आपसी सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। भागवत ने भारतीय सांस्कृतिक दृष्टिकोण को समावेशी बताते हुए कहा कि विभिन्न समुदायों और विचारों के प्रति
LIVE 24 TV · 19/41
सम्मान भारत की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि जब समाज में आपसी संपर्क कम हुआ और विभाजन की भावना बढ़ी, तब देश कमजोर हुआ। इसलिए आज भारत को अपनी राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की आवश्यकता है। इस
LIVE 24 TV · 20/41
दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन, बंगाल विभाजन और राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि राष्ट्र के प्रति समर्पण, साझा ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर सामाजिक एकता को मजबूत किया जा सकता है। 5. नशे की बढ़ती समस्या
LIVE 24 TV · 21/41
पर चिंता भागवत ने अपने संबोधन में नशीले पदार्थों की बढ़ती लत को गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताया। उन्होंने कहा कि नशे का प्रभाव केवल किसी व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक संबंधों और भविष्य पर भी पड़ता है। उनके अनुसार, युवाओं में नशे
LIVE 24 TV · 22/41
के प्रति आकर्षण रोकने के लिए सरकार, प्रशासन, शिक्षण संस्थानों और परिवारों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से युवाओं के साथ संवाद बनाए रखने तथा उनमें सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने की अपील की। भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक
LIVE 24 TV · 23/41
नशामुक्ति के क्षेत्र में काम कर रहे संगठनों और व्यक्तियों को जोड़कर राष्ट्रव्यापी प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। 6. स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और पंच परिवर्तन से विकसित भारत का संकल्प अपने संबोधन में मोहन भागवत ने भारत के समग्र विकास के
LIVE 24 TV · 24/41
लिए स्वदेशी सोच, सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक अनुशासन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संघ के 'पंच परिवर्तन' अभियान को व्यवहार और जीवनशैली में बदलाव लाने का माध्यम बताया। भागवत ने स्पष्ट किया कि ये अभियान केवल एक वर्ष के लिए नहीं हैं। इनका उद्देश्य
LIVE 24 TV · 25/41
नागरिकों के व्यवहार और आदतों में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने विकास के ऐसे मॉडल की आवश्यकता बताई जो आर्थिक समृद्धि के साथ पर्यावरण, सामाजिक संतुलन और मानवीय मूल्यों का भी ध्यान रखे। कार्यक्रम में इजराइल के महावाणिज्य दूत भी पहुंचे
LIVE 24 TV · 26/41
नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विजयादशमी उत्सव में देश-विदेश की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ शामिल हुए। इसके अलावा, इजराइल के महावाणिज्य दूत यानिव
LIVE 24 TV · 27/41
रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी उपस्थित रहे। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पारंपरिक शस्त्र पूजन किया और उपस्थित स्वयंसेवकों को संबोधित किया। मोहन भागवत के पिछले 5 वर्षों
LIVE 24 TV · 28/41
के दशहरा संबोधनों के प्रमुख मुद्दे (2021–2025) 2026 से पहले के पांच संबोधनों में ये मुद्दे प्रमुख रहे। RSS की स्थापना कब हुई थी? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का एक हिंदू राष्ट्रवादी स्वयंसेवी संगठन है, जिसकी स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन
LIVE 24 TV · 29/41
नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। वर्ष 2025 में संघ ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए और 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी पर शताब्दी समारोहों का समापन हुआ और संगठन का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ निर्धारित किया गया।। संघ के अनुसार, इसका
LIVE 24 TV · 30/41
प्रमुख उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और सामाजिक एवं राष्ट्रीय जीवन में अनुशासित स्वयंसेवकों को तैयार करना था। RSS में शामिल होने के लिए कितनी उम्र होनी चाहिए? RSS में शामिल होने के लिए 18 वर्ष का होना अनिवार्य नहीं है। इसकी शाखाओं में बालक,
LIVE 24 TV · 31/41
किशोर, युवा और वयस्क शामिल होते हैं। संघ की आधिकारिक सदस्यता संबंधी जानकारी में कोई सार्वभौमिक न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं बताई गई है। छोटी उम्र के बच्चों के लिए बाल शाखाओं की व्यवस्था भी होती है। उन्हें बाल स्वयंसेवक कहा जाता है । संघ के आधिकारिक FAQ
LIVE 24 TV · 32/41
के अनुसार, पुरुष स्वयंसेवक शाखा से जुड़ सकते हैं। महिलाओं के लिए समान विचारधारा से जुड़ा अलग संगठन राष्ट्र सेविका समिति है। शाखा में शामिल होने के लिए कोई औपचारिक सदस्यता शुल्क या अनिवार्य सदस्यता फॉर्म नहीं है। इच्छुक व्यक्ति निकटतम शाखा से संपर्क
LIVE 24 TV · 33/41
कर सकता है। बात करें इस संघ की शाखाओं की तो संघ के मुताबिक देशभर में 73 हज़ार से ज़्यादा शाखाएं हैं। इसमें ज्यादातर शाखाएं सुबह लगती हैं तो कुछ शाम को। RSS का गणवेश पहले कैसा था और अब कैसा है? सबसे बड़ा बदलाव 2016 में हुआ। उस वर्ष संघ ने लगभग नौ
LIVE 24 TV · 34/41
दशकों से इस्तेमाल हो रही खाकी हाफ पैंट हटाकर भूरे रंग की फुल पैंट को गणवेश में शामिल किया। संघ के पदाधिकारियों ने इसे बदलते समय और स्वयंसेवकों की सुविधा के अनुरूप लिया गया निर्णय बताया था। दैनिक शाखा में पूरा गणवेश पहनना सामान्यतः अनिवार्य नहीं है;
LIVE 24 TV · 35/41
विशेष कार्यक्रमों में इसका उपयोग होता है। RSS की शुरुआती प्रार्थना किस भाषा में थी और किसने लिखी थी? संघ की शुरुआती प्रार्थना हिंदी और मराठी, दोनों भाषाओं में थी। नियमित शाखाओं में प्रार्थना की परंपरा 1926 में शुरू हुई। संघ का विस्तार अलग-अलग भाषाई
LIVE 24 TV · 36/41
क्षेत्रों में होने के बाद एक समान प्रार्थना की आवश्यकता महसूस हुई। वर्ष 1939 में प्रार्थना को संस्कृत में तैयार करने का निर्णय लिया गया। नरहरि नारायण भिड़े ने डॉ. हेडगेवार और एम. एस. गोलवलकर के मार्गदर्शन में संस्कृत प्रार्थना की रचना की। 1940 से
LIVE 24 TV · 37/41
संस्कृत प्रार्थना का इस्तेमाल शुरू हुआ। आपको बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सालभर में छह प्रमुख उत्सव मनाता है। इनमें वर्ष प्रतिपदा, हिंदू साम्राज्य दिवस, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, विजयादशमी और मकर संक्रांति शामिल हैं। इन उत्सवों के माध्यम से संघ
LIVE 24 TV · 38/41
स्वयंसेवकों और समाज के बीच सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता, संगठन, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने पर जोर देता है। प्रत्येक उत्सव का अपना ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व है। नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी
LIVE 24 TV · 39/41
कार्यक्रम संगठन के लिए शताब्दी समारोहों के समापन का महत्वपूर्ण अवसर रहा। मोहन भागवत के संबोधन में राष्ट्रीय एकता के साथ वैश्विक अस्थिरता, तकनीकी परिवर्तन और युवा पीढ़ी की चुनौतियां प्रमुख रूप से सामने आईं। उन्होंने भारत की विविधता को स्वीकार करने,
LIVE 24 TV · 40/41
बदलते समय के साथ सकारात्मक बदलाव अपनाने तथा सामाजिक मतभेदों को संघर्ष में बदलने से बचने की आवश्यकता बताई। वहीं AI के जिम्मेदार उपयोग, डिजिटल सामग्री पर विवेकपूर्ण दृष्टिकोण, नशामुक्ति, स्वदेशी और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों के जरिए उन्होंने भविष्य
LIVE 24 TV · 41/41
के भारत के लिए अपनी सामाजिक-सांस्कृतिक परिकल्पना प्रस्तुत की।