LIVE 24 TV · 1/38
राजस्थान में वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के बाद उनकी IPS पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर पर भी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। परिवार द्वारा ढाई साल में खरीदे गए 40 विला-कॉटेज, संपत्तियों की घोषित कीमत और लीज समझौतों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) जांच कर रहा है।
LIVE 24 TV · 2/38
LIVE 24 TV | राजस्थान | 31 अक्टूबर 2026 जयपुर: राजस्थान के प्रशासनिक महकमे में 40 विला-कॉटेज की खरीद का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के बाद अब उनकी पत्नी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को भी राज्य
LIVE 24 TV · 3/38
सरकार ने APO (Awaiting Posting Orders) कर दिया है। इसका अर्थ है कि उन्हें मौजूदा पद से हटाकर अगले पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा में रखा गया है। कार्मिक विभाग ने 31 अक्टूबर को प्रशाखा माथुर के संबंध में आदेश जारी किया। इससे पहले 28 अक्टूबर की रात शिखर
LIVE 24 TV · 4/38
अग्रवाल को भी प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए APO किया गया था। यह पूरा विवाद उदयपुर और अलवर में परिवार के सदस्यों के नाम खरीदी गई 40 संपत्तियों से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, इनकी कुल घोषित खरीद कीमत करीब ₹6.16 करोड़ थी, जबकि इन्हें उसी कंपनी
LIVE 24 TV · 5/38
को लीज पर देने के समझौतों में सालाना ₹1.80 करोड़ की राशि तय की गई थी। अब एसीबी संपत्तियों की खरीद, लेनदेन, संभावित अनुचित लाभ और संबंधित कंपनी से अधिकारियों के संबंधों की जांच कर रहा है। हालांकि, अभी आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है और दोनों
LIVE 24 TV · 6/38
अधिकारियों को दोषी घोषित नहीं किया गया है। ढाई साल में कैसे खरीदे गए 40 विला और कॉटेज? राजस्थान के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी IPS अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर की संपत्तियों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है
LIVE 24 TV · 7/38
कि दंपति और उनके परिवार ने महज ढाई साल के भीतर 40 विला और कॉटेज खरीदे, जिनकी रजिस्ट्री में कुल कीमत 6 करोड़ 16 लाख 50 हजार रुपये दर्ज बताई गई है। इतनी बड़ी संख्या में संपत्तियों की खरीद और उनकी कीमत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के
LIVE 24 TV · 8/38
मुताबिक, सितंबर 2023 में परिवार ने उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 कॉटेज खरीदे। इसके बाद मार्च 2026 में अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे गए। इस तरह करीब ढाई साल में कुल 40 संपत्तियां परिवार के नाम दर्ज हुईं। सभी
LIVE 24 TV · 9/38
संपत्तियां गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से खरीदी गईं। इन संपत्तियों की रजिस्ट्री शिखर अग्रवाल, प्रशाखा माथुर, उनके दोनों बेटों और प्रशाखा के माता-पिता के नाम पर होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, कुल 40 संपत्तियों में से 28 विला-कॉटेज
LIVE 24 TV · 10/38
अकेले IAS-IPS दंपति के नाम दर्ज बताए गए हैं। मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिन संपत्तियों को खरीदा गया, उन्हें बेचने वाली कंपनी को ही लीज पर देने के समझौते किए गए। इन समझौतों के तहत परिवार को सालाना करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये की लीज राशि
LIVE 24 TV · 11/38
मिलने का प्रावधान बताया गया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि संपत्तियों की खरीद के लिए धन का स्रोत क्या था, रजिस्ट्री में दर्ज कीमत बाजार मूल्य के अनुरूप थी या नहीं और क्या सरकारी अधिकारियों के लिए निर्धारित संपत्ति संबंधी नियमों का पालन किया गया। संपत्ति
LIVE 24 TV · 12/38
के ब्योरे में अंतर से क्यों उठे सवाल? विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू अधिकारियों द्वारा जमा किए गए अचल संपत्ति विवरण यानी इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) से जुड़ा है। सरकारी सेवा में कार्यरत IAS और IPS अधिकारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी अचल
LIVE 24 TV · 13/38
संपत्तियों की जानकारी देनी होती है। इससे संपत्ति के स्वामित्व, खरीद के स्रोत और संभावित हितों के टकराव की समीक्षा की जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, IAS शिखर अग्रवाल ने 7 जनवरी 2026 को दाखिल अपने संपत्ति विवरण में 14 संपत्तियों का उल्लेख किया था।
LIVE 24 TV · 14/38
वहीं, IPS प्रशाखा माथुर ने 8 जनवरी 2026 को जमा विवरण में संपत्ति संबंधी जानकारी शून्य दर्ज की थी। दूसरी तरफ, सामने आए रजिस्ट्री दस्तावेजों में परिवार के नाम कुल 40 विला-कॉटेज की खरीद की जानकारी बताई गई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि इन संपत्तियों का
LIVE 24 TV · 15/38
अधिकारियों के व्यक्तिगत विवरण से क्या संबंध है और संबंधित नियमों के अनुसार कौन-सी संपत्तियां घोषित की जानी आवश्यक थीं। हालांकि, किसी विशेष तिथि के संपत्ति विवरण की तुलना करते समय खरीद की वास्तविक तारीख, स्वामित्व और बाद में किए गए लेनदेन को ध्यान में
LIVE 24 TV · 16/38
रखना जरूरी है। केवल अलग-अलग दस्तावेजों में आंकड़ों का अंतर सामने आने से नियमों के उल्लंघन की अंतिम पुष्टि नहीं होती। ACB जांच में निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के भी आरोप राजस्थान के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर से जुड़े 40
LIVE 24 TV · 17/38
विला-कॉटेज खरीद मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। अब जांच केवल करोड़ों रुपये की संपत्तियों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि एक निजी कंपनी को कथित तौर पर सरकारी लाभ पहुंचाने और पद के दुरुपयोग के आरोपों की भी
LIVE 24 TV · 18/38
पड़ताल की जा रही है। राजस्थान सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत शिखर अग्रवाल के खिलाफ विस्तृत जांच की मंजूरी दे दी। एसीबी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे अधिकारी और निजी कंपनी के
LIVE 24 TV · 19/38
बीच संभावित मिलीभगत की आशंका पैदा हुई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि शिखर अग्रवाल ने विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर रहते हुए गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया। यह कंपनी अनंता ब्रांड के तहत होटल और रिसॉर्ट संचालित
LIVE 24 TV · 20/38
करती है। आरोपों में रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में कथित छूट देना, आवश्यक प्रमाणपत्रों की पर्याप्त जांच के बिना मंजूरी दिलाना और कंपनी को विशेष रियायती वित्तीय पैकेज उपलब्ध कराना शामिल है। एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के मुताबिक, उद्योग विभाग की
LIVE 24 TV · 21/38
रिपोर्ट, मीडिया में प्रकाशित जानकारियों और गोपनीय स्रोतों से मिली सूचनाओं के आधार पर मामले की प्रारंभिक जांच की गई। सबसे महत्वपूर्ण सवाल 27 मार्च 2026 की तारीख को लेकर उठ रहा है। एसीबी के अनुसार, इसी दिन 20 विला की रजिस्ट्री होने और कंपनी को विशेष
LIVE 24 TV · 22/38
वित्तीय पैकेज जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध की जांच कर रही है। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या सरकारी पद का इस्तेमाल कर कंपनी को वित्तीय लाभ पहुंचाया गया और क्या इसके बदले परिवार को बाजार मूल्य
LIVE 24 TV · 23/38
से कम कीमत पर संपत्तियां मिलीं। IAS शिखर अग्रवाल किन महत्वपूर्ण पदों पर रहे? आपको बता दें कि शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1993 बैच के IAS अधिकारी हैं। कार्रवाई से पहले वह उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), निवेश संवर्धन और औद्योगिक विकास
LIVE 24 TV · 24/38
से जुड़े कई विभागों में अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके अलावा वह राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) के अध्यक्ष और राजस्थान लघु उद्योग निगम (RAJSICO) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी
LIVE 24 TV · 25/38
कार्यरत थे। इन संस्थाओं की भूमिका राज्य में औद्योगिक निवेश, उद्योगों के विकास और कारोबारी सुविधाओं के विस्तार से जुड़ी है। इससे पहले फरवरी 2024 से नवंबर 2025 तक शिखर अग्रवाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अतिरिक्त मुख्य सचिव रहे। अपने प्रशासनिक करियर
LIVE 24 TV · 26/38
में वह उदयपुर और बीकानेर के जिला कलेक्टर तथा जयपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त सहित कई प्रमुख पदों पर काम कर चुके हैं। वहीं, उनकी पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर 1995 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी हैं। कार्रवाई से पहले वह जयपुर में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG),
LIVE 24 TV · 27/38
योजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण के पद पर तैनात थीं। राजस्थान सरकार ने 28 अक्टूबर को शिखर अग्रवाल और 31 अक्टूबर को प्रशाखा माथुर को प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए APO कर दिया। दोनों अधिकारियों के महत्वपूर्ण पदों पर रहने के कारण यह मामला प्रशासनिक और
LIVE 24 TV · 28/38
राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब एसीबी जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित संपत्ति सौदों और सरकारी फैसलों के बीच कोई अनुचित संबंध था या नहीं। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और किसी आपराधिक दोष की पुष्टि नहीं हुई है। अशोक गहलोत ने
LIVE 24 TV · 29/38
उठाए सवाल, CBI और ED से जांच कराने की मांग राजस्थान में IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर से जुड़े 40 विला-कॉटेज खरीद मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल शर्मा सरकार पर गंभीर सवाल
LIVE 24 TV · 30/38
उठाते हुए पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की मांग की है। 30 अक्टूबर को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गहलोत ने कहा कि इतने बड़े संपत्ति विवाद में केवल अधिकारियों को APO करना पर्याप्त नहीं है।
LIVE 24 TV · 31/38
उन्होंने सवाल उठाया कि संबंधित निजी कंपनी को सरकारी रियायतें कैसे मिलीं और इन फैसलों में मुख्यमंत्री कार्यालय की क्या भूमिका थी। गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में कंपनी को रियायतें देने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने
LIVE 24 TV · 32/38
मांग की कि उद्योग विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय में शिखर अग्रवाल के कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे भजनलाल सरकार के कार्यकाल का बड़ा घोटाला बताते हुए मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की
LIVE 24 TV · 33/38
मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों की जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। APO क्या है? क्या पद से हटाए जाने का मतलब निलंबन है? राजस्थान में 40 विला-कॉटेज खरीद मामले को लेकर वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी IPS अधिकारी
LIVE 24 TV · 34/38
डॉ. प्रशाखा माथुर को APO किए जाने के बाद एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या APO होने का मतलब अधिकारी का निलंबन है? प्रशासनिक नियमों के अनुसार, APO और निलंबन दो अलग-अलग स्थितियां हैं। APO का पूरा नाम Awaiting Posting Orders है। हिंदी में इसका अर्थ है
LIVE 24 TV · 35/38
'पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा'। जब सरकार किसी अधिकारी को उसके मौजूदा पद से हटाकर नई नियुक्ति नहीं देती, तो उसे APO की स्थिति में रखा जाता है। इस दौरान अधिकारी सरकारी सेवा में बना रहता है, लेकिन उसके पास पहले वाली जिम्मेदारियां नहीं होतीं। APO किए
LIVE 24 TV · 36/38
जाने का मतलब यह नहीं है कि अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो गए हैं या उसे सरकारी नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। यह एक प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसका इस्तेमाल तबादले, विभागीय बदलाव या अन्य प्रशासनिक परिस्थितियों में भी किया जा सकता है।
LIVE 24 TV · 37/38
वहीं, निलंबन एक अलग प्रक्रिया है। निलंबन के दौरान अधिकारी को नियमानुसार नियमित कार्यों से अलग किया जाता है। उसे वेतन के स्थान पर निर्धारित नियमों के अनुसार निर्वाह भत्ता मिल सकता है। निलंबन भी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होता। राजस्थान
LIVE 24 TV · 38/38
सरकार के सेवा नियमों के अनुसार, APO की अवधि में अधिकारी को सामान्यतः ड्यूटी पर माना जाता है। सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि APO का इस्तेमाल अनुशासनात्मक कार्रवाई के विकल्प के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।