
पिता ने छोले-कुलचे बेचकर बेटे के सपनों को दी उड़ान
6 नवंबर 2026 को ओमान में खेले गए अंडर-19 एशिया कप मुकाबले में भारत के युवा गेंदबाजों ने नेपाल के बल्लेबाजों को मुश्किल में डाल दिया। तेज गेंदबाज ईशान सूद ने 10 ओवर में महज 18 रन देकर तीन विकेट हासिल किए, जबकि ऑफ स्पिनर अर्जुन राजपूत ने 5.3 ओवर में केवल आठ रन खर्च कर तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा।

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 6 नवंबर 2026
नई दिल्ली। कहते हैं कि सपनों को पूरा करने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं, बल्कि हौसला, मेहनत और परिवार का साथ होना जरूरी है। भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के युवा खिलाड़ी अर्जुन राजपूत की कहानी इसी विश्वास को मजबूत करती है। कभी उनके पिता परिवार की आजीविका चलाने के लिए सड़क किनारे छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाते थे। आज उसी पिता का बेटा भारतीय टीम की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहा है।
नेपाल के खिलाफ अर्जुन की शानदार गेंदबाजी
6 नवंबर 2026 को ओमान में खेले गए अंडर-19 एशिया कप मुकाबले में भारत के युवा गेंदबाजों ने नेपाल के बल्लेबाजों को मुश्किल में डाल दिया। तेज गेंदबाज ईशान सूद ने 10 ओवर में महज 18 रन देकर तीन विकेट हासिल किए, जबकि ऑफ स्पिनर अर्जुन राजपूत ने 5.3 ओवर में केवल आठ रन खर्च कर तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा।भारतीय गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के सामने नेपाल की पूरी टीम 42.3 ओवर में 128 रन पर सिमट गई। अर्जुन ने सचिन भट्ट को एलबीडब्ल्यू आउट किया, जबकि नीतेश पटेल और सुशील रावल को बोल्ड कर अपनी गेंदबाजी का प्रभाव दिखाया।लेकिन अर्जुन के इन तीन विकेटों के पीछे केवल क्रिकेट का हुनर नहीं, बल्कि संघर्ष, पारिवारिक त्याग और वर्षों की मेहनत की कहानी भी छिपी है।
पिता ने छोले-कुलचे बेचकर पूरा किया बेटे का सपना
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अर्जुन राजपूत के पिता होती राम पंजाब के जालंधर में छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाते थे। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटे के क्रिकेट खेलने के सपने को आगे बढ़ाने में सहयोग किया।रिपोर्ट के अनुसार, अब होती राम की बेकरी की दुकान है और वह कुलचे बनाकर उनकी डिलीवरी का काम करते हैं। परिवार की आजीविका के लिए किए गए उनके संघर्ष ने अर्जुन की उपलब्धि को और विशेष बना दिया है।
क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए नियमित अभ्यास, बेहतर प्रशिक्षण, खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं में अवसर महत्वपूर्ण होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए इन जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं होता।अर्जुन की कहानी ऐसे हजारों माता-पिताओं की उम्मीदों का प्रतीक है, जो सीमित कमाई के बावजूद अपने बच्चों को बड़े सपने देखने से नहीं रोकते।
बल्ले से भी दिखा चुके हैं प्रतिभा
अर्जुन राजपूत केवल गेंदबाजी तक सीमित नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वह बल्लेबाजी में भी अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं और दोहरा शतक लगा चुके हैं।युवा क्रिकेट में गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने की क्षमता किसी भी खिलाड़ी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। अर्जुन की यही विशेषता उन्हें भविष्य के लिए एक संभावनाशील ऑलराउंडर बनाती है। हालांकि शीर्ष स्तर पर उनकी सफलता नियमित प्रदर्शन और निरंतर मेहनत पर निर्भर करेगी।
भारतीय टीम तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 30 अक्टूबर 2026 को अंडर-19 एशिया कप के लिए घोषित टीम में अर्जुन राजपूत को शामिल किया था। इससे पहले जून 2026 में श्रीलंका दौरे की अंडर-19 वनडे टीम में भी उनका चयन हुआ था।ये चयन बताते हैं कि अर्जुन घरेलू और जूनियर क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा से आगे निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं।
मेहनत और पिता के संघर्ष से युवाओं को प्रेरणा
अर्जुन की उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो आर्थिक परेशानियों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह को चुनौतीपूर्ण जरूर बना सकती हैं, लेकिन प्रतिभा, मेहनत और सही अवसर मिलने पर आगे बढ़ना संभव है।यह कहानी समाज को एक और महत्वपूर्ण संदेश देती है कि प्रतिभा केवल संपन्न परिवारों में नहीं जन्म लेती। देश की गलियों, छोटे घरों और मेहनतकश परिवारों में भी भविष्य के बड़े खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।एक पिता ने छोले-कुलचे बेचकर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाई और बेटे के क्रिकेट के सपने को सहारा दिया। आज उसी बेटे की गेंदबाजी देश का ध्यान आकर्षित कर रही है।
अर्जुन राजपूत के सामने अभी लंबा क्रिकेट करियर है। उन्हें अपनी प्रतिभा को लगातार बेहतर बनाना होगा, लेकिन भारतीय अंडर-19 टीम तक पहुंचने की उनकी यात्रा पहले ही एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।अर्जुन की कहानी का सबसे बड़ा संदेश है—सपनों की ऊंचाई परिवार की आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि मेहनत, अवसर और उन्हें पूरा करने के संकल्प से तय होती है।
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